When your criticism agitates you (Hindi Thought) जब आप अपनी आलोचना सुन कर उत्तेजित हो जाते है

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When your criticism agitates you


जब आप अपनी आलोचना सुन कर उत्तेजित हो जाते है तो आप आलोचना करने वाले की कठपुतली मात्र बन कर रह जाते हो।    अरविन्द कटोच

When your criticism agitates you, then you become a puppet in the hands on person who critique you.    Arvind Katoch


Hindi Thought of the Day

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"पेड़ की शाखा पर बैठा पंछी कभी भी डाल हिलने से नहीं घबराता क्योंकि पंछी डाली पर नही अपने पंखों पर भरोसा करता है।"  Hindi Though...

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